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त्र्यंबकेश्वर उप-जिला अस्पताल की इमारत गिराने का काम फिलहाल रुका, पांच स्थानों पर विचार

नासिक। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने शनिवार को कहा कि त्र्यंबकेश्वर उप-जिला अस्पताल की मौजूदा इमारत को गिराने का प्रस्ताव फिलहाल रोक दिया गया है। सरकार अस्पताल को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए पांच संभावित स्थानों पर विचार कर रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के स्थानांतरण को लेकर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले स्थानीय लोगों से चर्चा की जाएगी और उनकी राय को भी ध्यान में रखा जाएगा।
अबितकर नासिक के दौरे पर थे, जहां उन्होंने आगामी नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेले को देखते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा की। इसी दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने त्र्यंबकेश्वर उप-जिला अस्पताल को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि फिलहाल अस्पताल की मौजूदा इमारत को गिराने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, विभाग को अस्पताल की इमारत गिराने का काम रोकने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए और मरीजों को इलाज के लिए किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसे प्राथमिकता दी जा रही है। इसी कारण अस्पताल का आउटपेशेंट डिपार्टमेंट यानी ओपीडी फिलहाल मौजूदा परिसर से ही संचालित होता रहेगा।
सरकार की ओर से अस्पताल को दूसरी जगह ले जाने के लिए पांच संभावित स्थलों की पहचान की गई है। इन स्थानों की उपयुक्तता का अध्ययन किया जा रहा है। अस्पताल के लिए नई जगह तय करते समय मरीजों की पहुंच, स्थानीय आबादी की जरूरत, स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और भविष्य की आवश्यकताओं जैसे पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।
अबितकर ने कहा कि अस्पताल को स्थानांतरित करने का फैसला केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं लिया जाएगा। स्थानीय नागरिकों से भी चर्चा की जाएगी। उनका कहना है कि त्र्यंबकेश्वर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका बेहद अहम है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय लोगों की जरूरतों और सुझावों को समझना जरूरी है।
त्र्यंबकेश्वर में आगामी कुंभ मेले को देखते हुए अस्पताल की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कुंभ के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना रहती है। इतने बड़े आयोजन के दौरान स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत होती है। ऐसे में अस्पताल की सेवाओं को सुचारू बनाए रखना सरकार के सामने प्रमुख चुनौती है।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा के दौरान मंत्री ने आगामी मेले के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। बड़ी संख्या में लोगों की संभावित आवाजाही को देखते हुए चिकित्सा केंद्रों, आपातकालीन सेवाओं, एंबुलेंस और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी। विभाग को आयोजन के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
त्र्यंबकेश्वर उप-जिला अस्पताल के स्थानांतरण का मुद्दा स्थानीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अस्पताल क्षेत्र के लोगों को नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराता है। ऐसे में मौजूदा अस्पताल को हटाने या दूसरी जगह ले जाने से पहले स्थानीय लोगों की सुविधा को ध्यान में रखना आवश्यक है। सरकार द्वारा पांच संभावित स्थलों पर विचार किया जाना इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अस्पताल की मौजूदा सेवाएं जारी रहेंगी। ओपीडी के मौजूदा स्थान से संचालित होने का मतलब है कि मरीजों को तत्काल चिकित्सा परामर्श और प्राथमिक सेवाओं के लिए किसी अन्य स्थान पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे अस्पताल के स्थानांतरण को लेकर तत्काल पैदा होने वाली संभावित परेशानियों को टाला जा सकेगा।
सरकार के सामने अब नई जगह का चयन करने के साथ-साथ अस्पताल के लिए बेहतर और टिकाऊ व्यवस्था तैयार करने की चुनौती है। पांच संभावित स्थानों में से कौन-सी जगह मरीजों और स्थानीय लोगों के लिए सबसे सुविधाजनक होगी, इसका आकलन किया जाएगा। इसके अलावा नई इमारत के निर्माण, आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं और कर्मचारियों की उपलब्धता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे।
स्वास्थ्य मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आगामी कुंभ मेले को लेकर तैयारियां तेज की जा रही हैं। इतने बड़े धार्मिक आयोजन में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर अतिरिक्त जिम्मेदारी रहती है। लाखों लोगों की संभावित मौजूदगी के बीच किसी भी तरह की स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों को तैयार रखना जरूरी होगा।
अबितकर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है और इसी आधार पर अस्पताल के भविष्य को लेकर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि स्थानीय लोगों से विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। इससे फिलहाल अस्पताल की इमारत गिराने को लेकर बनी अनिश्चितता दूर हुई है।
फिलहाल त्र्यंबकेश्वर उप-जिला अस्पताल की मौजूदा इमारत को गिराने का काम रोक दिया गया है और ओपीडी पहले की तरह संचालित होती रहेगी। सरकार पांच संभावित स्थानों का अध्ययन करने के साथ स्थानीय नागरिकों से चर्चा करेगी। इसके बाद ही अस्पताल के स्थानांतरण को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आगामी कुंभ मेले को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।





